आज के समय में आरक्षण एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिसकी चारो और चर्चा है,तो दोस्तों उसी आरक्षण रूपी समस्या को लेकर मेने भी चंद लाइन लिखी है इसी उम्मीद के साथ की शायद आप भी इससे सहमत हों। आरक्षण आरक्षण के कीड़े ने कर दिया है देश को खोखला , पढ़ा लिखा बेकार खड़ा और अनपढ़ करे ढकोसला। सामान्य की श्रेणी में जो भी युवा आए , जी तोड़ करे वो मेहनत और आगे बढ़ना चाहे। ना रहम ना भीख यारो वो किसी से चाहे , फिर भी उसके हिस्से का पद उसको न मिल पाए। में ये नहीं कहता की सामान्य वर्ग को अधिकार मिले , पर जिसकी जैसी योग्यता वैसा उसको अवसर मिले। आरक्षण की बेड़ी को क्यों पैरो में हम डाल चले , जब रहना ही पीछे तो इतना क्यों हम पड़े लिखे । बहुत हो गया आरक्षण का वार अब , देश की प्रगति को कब तक रोकेंगे हम सब। आओ मिल कर खतम करे देश की इस समस्या को अब , हर कंधो पर एक समान हो देश की भागेदारी अब। आरक्षण के कीड़े ने कर दिया है देश को खोखला ...
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दोस्तों लो आज फिर नया अफ़साना ले आए,अपनी कलम से आज दर्द का फ़साना लिख लाये………….. दर्द यु न देखो मुझे की में टुट जाऊंगा , आज जो बिखरा तो फिर सिमट न पाउँगा । कहने को तो साथ चलती हे ये हवाए भी , पर इस राह पर तो साया भी साथ छोड़ जायेगा । क्या पाया हमने और क्या खो दिया कोई न समज़ पायेगा , टुटा है दिल ऐसे की फिर जुड़ न पायेगा। पूछते हो दिल का हाल मेरे, में कैसे ये बतलाऊंगा , दर्द देकर भी अनजान है जो में, उनका नाम कैसे कह पाउँगा। Sho...
एहसास जुबा से कम ही काम लेता हूँ। नजर आते ही उनको नजरो से बाँध लेता हूँ। फिर शुरू होती है आँखो ही आँखो में अनकही बाते । कुछ कहूँ या न कहूँ , ये सोचकर दिल थाम लेता हूँ। यु अचानक नजरे झुकाकर तोड़ दी बे जुबा बातो की लड़ी। पलकों को गिराकर फिर उठाना बिना कुछ कहे सबकुछ कह जाना। पलकों को मूँद कर , अनकहे होठो को विराम देता हूँ। Shobhna vyas(Soha)

Nice
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