दोस्तों लो आज फिर नया अफ़साना ले आए,अपनी कलम से आज दर्द का फ़साना लिख लाये………….. दर्द यु न देखो मुझे की में टुट जाऊंगा , आज जो बिखरा तो फिर सिमट न पाउँगा । कहने को तो साथ चलती हे ये हवाए भी , पर इस राह पर तो साया भी साथ छोड़ जायेगा । क्या पाया हमने और क्या खो दिया कोई न समज़ पायेगा , टुटा है दिल ऐसे की फिर जुड़ न पायेगा। पूछते हो दिल का हाल मेरे, में कैसे ये बतलाऊंगा , दर्द देकर भी अनजान है जो में, उनका नाम कैसे कह पाउँगा। Sho...
Popular posts from this blog
BACHPAN मन चंचल और रूप है प्यारा, बचपन का हर अंदाज निराला । मन में छुपी कई शैतानी, बंद मुठी से पकडे पानी । दिल में रखते अरमान कई , आसमान को छुने के। धरती पर तारो को लाके , उनके साथ है खेलने के । ना कोई चिंता ना है फिकर, मन पतंग सा उड़ता बेखबर । कितनी उमंगे कितना है काम, फिर भी हर कोई कहता है नादान। नई सुबह फिर नए है सपने, बचपन का बस यही है काम। SHOBHNA VYAS
एहसास जुबा से कम ही काम लेता हूँ। नजर आते ही उनको नजरो से बाँध लेता हूँ। फिर शुरू होती है आँखो ही आँखो में अनकही बाते । कुछ कहूँ या न कहूँ , ये सोचकर दिल थाम लेता हूँ। यु अचानक नजरे झुकाकर तोड़ दी बे जुबा बातो की लड़ी। पलकों को गिराकर फिर उठाना बिना कुछ कहे सबकुछ कह जाना। पलकों को मूँद कर , अनकहे होठो को विराम देता हूँ। Shobhna vyas(Soha)

Nice
ReplyDelete