बात सोच की है
Hello Friends, में सोहा आज आपके लिए कविता नहीं,अपने द्वारा रचित एक छोटी सी रचना को आप लोगो से बांटना चाहती हु,इसी उम्मीद के साथ की मेरी कविताओ की तरह मेरी रचना भी आपको पसंद आये........ बात सोच की है एक बार की बात है हम बस स्टॉप पर अपनी बस का इंतजार कर रहे थे वहा एक कार आकर रुकी कार चालक एक महिला थी जो कार से कुछ सामान लेने उतरी थी ,हम ने देखा कार में पीछे की सीट पर एक बुजुर्ग दम्पती बैठे थे,कुछ देर के बाद हमसे रहा नहीं गया हमने उनसे बात करना चाही ,हमने नमस्कार किया ,दम्पति ने भी अभिवादान किया ,अच्छे लोग प्रतीत हो रहे थे ,हमारे बीच कुछ क्षण बात हुई,हमने कहा आपने अपनी बेटी को बहुत अच्छी सिख दी है उसे अपने कार्य के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहना होगा।महानुभाव ने कहा ये हमारी बेटी नहीं बहु है जनाब ,हम उसे अपनी बेटी के जैसा ही मानते है। ये सुन हमारा मन बहुत खुश हुआ महिलाओ को यु बराबरी मान सम्मान मिलते देख हमें बड़ी खुशी होती है ,और जब ...