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बात सोच की है

Hello Friends,                        में सोहा आज आपके लिए कविता नहीं,अपने द्वारा रचित  एक छोटी सी रचना को आप लोगो से बांटना चाहती हु,इसी उम्मीद  के साथ की मेरी कविताओ की तरह मेरी रचना भी आपको  पसंद आये........ बात सोच की है  एक बार की बात है हम बस स्टॉप पर अपनी बस का इंतजार कर रहे थे वहा एक कार आकर रुकी कार चालक एक महिला थी जो कार से कुछ सामान लेने उतरी थी ,हम ने देखा कार में पीछे की सीट पर एक बुजुर्ग दम्पती  बैठे थे,कुछ देर के बाद हमसे रहा  नहीं गया हमने उनसे बात करना चाही ,हमने नमस्कार किया ,दम्पति ने भी अभिवादान किया ,अच्छे लोग प्रतीत हो रहे थे ,हमारे बीच कुछ क्षण बात हुई,हमने कहा आपने अपनी बेटी को बहुत अच्छी  सिख दी है उसे अपने कार्य के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहना होगा।महानुभाव ने कहा ये हमारी बेटी नहीं बहु है जनाब ,हम उसे अपनी बेटी के जैसा ही मानते  है।  ये सुन हमारा मन बहुत खुश हुआ महिलाओ को यु बराबरी  मान सम्मान मिलते देख हमें बड़ी खुशी होती है ,और जब ...

याद

याद  याद आ रही है आज उनकी बहुत , उनको भी आ रही होगी याद हमारी बहुत। ये मौसम ही कुछ मदहोश कर रहा है,     इस बारिश में आज भीगने को जी कर रहा है। ये ठंडी हवाए जुल्फों को मेरी उड़ाए, नजरे बस उनको ही ढूंढना चाहे। बिन गीत और साज के ये पायल क्यों  दे झंकार चुडियो की खन खन क्यों उनका ही नाम ले। जो हाल इस दिल का है वो हाल उनका भी होगा, सपना कोई नया आखो में उनकी भी सज रहा होगा। Shobhna Vyas (सोहा)
एहसास जुबा से कम ही काम लेता हूँ।                             नजर आते ही उनको नजरो से बाँध लेता हूँ। फिर शुरू होती है    आँखो ही आँखो में                                                                      अनकही बाते । कुछ कहूँ या न कहूँ , ये सोचकर दिल थाम लेता हूँ। यु   अचानक   नजरे   झुकाकर   तोड़ दी बे जुबा बातो की लड़ी। पलकों को गिराकर   फिर उठाना   बिना कुछ कहे सबकुछ कह जाना। पलकों को मूँद कर , अनकहे होठो को विराम देता हूँ। Shobhna vyas(Soha)
दोस्तों लो आज फिर नया अफ़साना ले आए,अपनी कलम से आज दर्द का फ़साना लिख लाये………….. दर्द यु न देखो मुझे की में टुट जाऊंगा , आज जो बिखरा तो फिर सिमट न पाउँगा । कहने को तो साथ चलती हे ये हवाए भी , पर इस राह पर तो साया भी साथ छोड़ जायेगा । क्या पाया हमने और क्या खो दिया कोई न समज़ पायेगा , टुटा है दिल ऐसे की फिर जुड़ न पायेगा। पूछते हो दिल का हाल मेरे, में कैसे ये बतलाऊंगा , दर्द देकर भी अनजान है जो में, उनका नाम कैसे कह   पाउँगा।                                                                                                                                       Sho...