दोस्तों लो आज फिर नया अफ़साना ले आए,अपनी कलम से आज दर्द का फ़साना लिख लाये…………..
दर्द


यु देखो मुझे की में टुट जाऊंगा,
आज जो बिखरा तो फिर सिमट पाउँगा

कहने को तो साथ चलती हे ये हवाए भी,
पर इस राह पर तो साया भी साथ छोड़ जायेगा

क्या पाया हमने और क्या खो दिया कोई समज़ पायेगा,
टुटा है दिल ऐसे की फिर जुड़ पायेगा।

पूछते हो दिल का हाल मेरे, में कैसे ये बतलाऊंगा,
दर्द देकर भी अनजान है जो में, उनका नाम कैसे कह पाउँगा।                                                                                                                                    Shobhna vyas(Soha)

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